DA HIKE Update 2026:देश में वरिष्ठ नागरिकों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन में संभावित बढ़ोतरी की खबरें तेज़ी से फैल रही हैं। मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए, केंद्र और राज्य सरकारें पेंशन राशि बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, आगामी वर्ष में मासिक पेंशन पांच हजार रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे लाखों परिवारों को वित्तीय राहत मिलेगी।
वर्तमान पेंशन की स्थिति
अभी देशभर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत पात्र नागरिकों को प्रति माह लगभग एक हजार से तीन हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि अलग-अलग राज्यों में भिन्न है और राज्य सरकारों की नीतियों पर निर्भर करती है। महंगाई की बढ़ती दर के कारण यह राशि कई परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। वरिष्ठ नागरिकों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को दवाइयों, चिकित्सा खर्च और दैनिक आवश्यकताओं के लिए अधिक धन की आवश्यकता होती है।
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बढ़ी हुई पेंशन के प्रस्ताव
सरकार तीन प्रमुख श्रेणियों में पेंशन बढ़ाने पर विचार कर रही है। वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना के अंतर्गत साठ वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्गों को लाभ मिलेगा। विधवा पेंशन योजना उन महिलाओं के लिए है जिन्होंने अपने जीवनसाथी को खो दिया है। दिव्यांगजन पेंशन योजना दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी अक्षमता के स्तर के आधार पर सहायता प्रदान करेगी। प्रस्तावित बढ़ी हुई पेंशन के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक पांच हजार रुपये, विधवा महिलाएं चार से साढ़े चार हजार रुपये, और दिव्यांगजन चार से पांच हजार रुपये प्राप्त कर सकते हैं।
कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा
19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से होटल, ढाबा और छोटे फूड बिजनेस पर सीधा असर पड़ा है। गैस महंगी होने से उनकी लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर पड़ता है। अंत में इसका भार ग्राहकों को ही उठाना पड़ता है, जिससे महंगाई और बढ़ जाती है।
एक ही देश में अलग-अलग कीमत क्यों
कई लोग यह सवाल करते हैं कि एक ही देश में गैस सिलेंडर के रेट अलग क्यों होते हैं। इसका कारण टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन खर्च और स्थानीय लागत है। जिन इलाकों में गैस डिपो पास होते हैं, वहां कीमत कम रहती है, जबकि दूर-दराज के इलाकों में रेट ज्यादा हो जाते हैं।
सब्सिडी को लेकर लोगों में भ्रम
आज भी कई उपभोक्ता मानते हैं कि गैस सब्सिडी पूरी तरह बंद हो गई है, जबकि सच्चाई यह है कि सीमित स्तर पर सब्सिडी अब भी दी जा रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह रकम सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती है, जिससे लोगों को पहले जैसी राहत महसूस नहीं होती।